Tuesday, July 21, 2020

NCERT class 9 English Beehive Chapter 16 summary The Bond Of Love (notes) explained (translation) in hindi

The Bond of Love Summary In English

The author gets a baby bear by chance
‘The Bond of Love’ is the story of love and friendship between a pet bear cub and the author’s wife. He got the bear cub for her by accident. Two years ago, they were passing through the sugarcane fields near Mysore. People were driving away the wild pigs from their fields. Some were shot dead and others escaped. Suddenly a sloth-bear came out of the f fields. She was panting in the hot sun.
The actual incident
The author dfdn’t want to shoot at her. One of his companions shot the bear on the spot. They came near the fallen animal. They saw a baby-bear riding on his mother’s back. The little bear ran around the dead body of his mother. He was making a pitiful noise. Then ‘ he ran away into a sugarcane field.
Author’s present to his wife
At last, the author was able to catch him The little bear struggled to free himself. He tried to scratch him with his long, hooked claws. They put him in a gunny-bag. They brought him to Bangalore. The author presented the little creature to his wife. She was really delighted. The cub was a male. She named it Bruno.
How baby bear is brought up
The author’s wife looked after the baby-bear like her own child. Bruno soon took to drinking milk from a bottle. He started eating and drinking a lot of things. He ate porridge, vegetables, fruit, nuts, meat, rice, eggs etc. He drank tea, milk, coffee and even beer and liquor.
How baby bear spends time
They had two Alsatian dogs. The baby bear became friendly with the dogs and all the children. He enjoyed himself freely. He spent his time in playing and running into the kitchen. He also slept in their beds.
A strange incident
One day an accident befell him. The author had put down barium carbonate in the library. It was a poison. It was put down there to kill rats. Bruno entered the library and ate some of the poison. He suffered from a stroke of paralysis. But he dragged himself slowly to the author’s wife. He was weakening rapidly. He was vomiting and breathing heavily.
Taken to a veterinary surgeon
He was taken to a veterinary surgeon. 10 c.c. of anti-dote was given to him. His condition remained unchanged. Another 10 c.c. was injected. Brupo got up and enjoyed a good meal. Another time the little bear drank a gallon of old engine oil. But it had no ill-effects whatever on him.
His joyful feats
Months rolled on. Bruno had grown in size. He had equalled the two dogs in height. He even looked bigger than them. At times, he was playful and mischievous. He was very fond of them all. Above all, he loved the author’s wife. She loved him too. She had changed his name from Bruno to Baba. The baby-bear could also do a few tricks. At her command, Baba could Nvrestle’ or “box’. He would hold a stick like a ‘gun’. But because of the tenants’ children, he had to be chained most of the time.
Bruno sent to Zoo in Mysore
The author, his son and friends advised her to give Baba to the Zoo at Mysore. He had become very big. He couldn’t be kept at home. At last, she consented. A letter was written to the curator of the zoo. The zoo sent a cage from Mysore in a lorry. Baba was packed off.
Bruno missed at home
But all of them missed Bruno greatly. His wife wept and was inconsolable. For a few days she would not eat anything. She wrote a number of letters to the curator of the Zoo. Even Baba was inconsolable there. He refused food too. He was well but looked thin and sad. The author stopped his wife from visiting Mysore for 3 months. She was adamant. At last, he took his wife to Bruno or Baba.
Author’s wife visits Bruno in the Zoo
Friends had guessed that the bear would not recognise her. But the moment Baba saw her he recognised her. He cried with happiness. She ran up to him. She patted him through the bars. He stood in delight. She would not leave the cage for 3 hours. She gave him tea, cakes, ice-cream etc. At last, the ‘closing time’ came. They had to leave now.
Getting Bruno back home
The author’s wife wept bitterly. Baba also cried bitterly. Fven the hard curator was sad and moved. She requested him to send Baba back. He showed his helplessness. Baba was now the government property. Then, they went to the superintendent. She pleaded with tears in her eyes. The superintendent was a kind- hearted man. He consented. He also lent them a cage for transporting Baba back to Bangalore. Baba was driven into a small cage. He was hoisted on the top of the car.
Bruno at home
At home, an island was made for Baba. It was twenty feet long and fifteen feet wide. It was surrounded by a moat. It was six feet wide and seven feet deep. A wooden box was kept for Baba to sleep in at night. Straw was placed inside to keep him warm. In a few days Baba was released in the island: He was delighted. The author’s wife spent hours sitting there. Baba sat on her lap. Baba was fifteen months old and quite heavy now.
Love between man and animals
It is the story of man’s love and friendship with a baby-bear. The baby-bear has many human qualities. He has sense of love, affection and loyalty.

The Bond of Love Summary In Hindi

लेखक को अचानक शिशु रीछ प्राप्त करना
‘प्यार का बन्धन’ एक सुस्त चाल वाले पालतू रीछ के बच्चे और लेखक की पत्नी के बीच प्यार और मित्रता की कहानी है। अकस्मात् ही उसे अपनी पत्नी के लिए रीछ का एक बच्चा मिल गया। दो साल पहले वे मैसूर के समीप गन्ने के खेतों से गुजर रहे थे। लोग अपने खेतों से जंगली सूअरों को भगा रहे थे। कुछ एक को गोली द्वारा मार दिया गया और बाकी बच कर निकल गये। अचानक एक सुस्त चाल वाली रीछनी खेतों से बाहर निकली। वह गर्म धूप में हाँफ रही थी।
वास्तविक घटना
लेखक उसके ऊपर गोली नहीं चलाना चाहता था। उसके एक साथी ने मौके पर ही रीछनी को गोली मार दी। वे गिरे हुए जानवर के पास आये। उन्होंने एक रीछ के बच्चे को अपनी माँ की कमर पर चढ़े हुए देखा। रीछ का छोटा बच्चा अपनी माँ के मृत शरीर के चारों ओर दौड़ा। वह दयनीय रूप से चीखें मार रहा था। फिर वह गन्ने के एक खेत में घुस गया।
लेखक को अपनी पत्नी को उपहार
आखिरकार लेखक उसे पकड़ने में सफल हुआ। छोटे से रीछ ने स्वयं को छुड़ाने के लिए संघर्ष किया। उसने लेखक को अपने मुड़े हुए लम्बे पंजों से खरोंचने का प्रयल किया। उन्होंने उसे बोरे में डाला। वे उसे बैंगलौर ले आये। लेखक ने इस छोटे से प्राणी को अपनी पत्नी को भेंट कर दिया। वह वास्तव में प्रसन्न हो गयी। यह रीछ का नर शावक था। उसने इसका नाम ब्रूनो रख दिया।
शिशु रीछ का पालन-पोषण
लेखक की पत्नी ने रीछ के शावक की देखभाल अपने बच्चे की तरह से की। ब्रूनो शीघ्र ही बोतल से दूध पीने लग गया। वह बहुत सी चीजें खाने और पीने लगा। वह दलिया, सब्जियाँ, फल, गिरियाँ, मांस, चावल, अण्डे इत्यादि खाता था। वह चाय, दूध, काफ़ी और बीयर और शराब भी पी जाता था।
शिशु रीछ कैसे समय व्यतीत करता है।
उनके पास दो अलशेसियन नस्ल के कुत्ते थे। रीछ का बच्चा कुत्ते के और सभी बच्चों के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करने लगा। वह मुक्त होकर आनन्द लेता। वह अपना समय खेलने और दौड़कर रसोई में आने में बिताता। वह उनके बिस्तरों पर भी सो जाता था।
एक आश्चर्यजनक घटना
एक दिन उसके साथ एक दुर्घटना घट गयी। लेखक ने लायब्रेरी में वेरियम कारबोनेट नीचे डाल रखी थी। यह एक प्रकार का जहर था। यह वहाँ चूहों को मारने के लिए डाला गया था। ब्रूनो लायब्रेरी में घुसा और कुछ जहर खा गया। वह लकवे के आघात से पीडित हो गया। लेकिन उसने धीरे से अपने को लेखक की पत्नी की ओर घसीटा। वह तेजी से कमजोर हो रहा था। वह उलटी कर रहा था और भारी-भारी साँस ले रहा था।
पशुओं के डाक्टर के पास ले जाया जाना
उसे पशुओं के एक डाक्टर के पास ले जाया गया। उसे 10 c.c. विषहर का टीका लगाया गया। उसकी अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। दोबारा 10 c.c. का टीका लगाया गया। ब्रूनो उठ गया और उसने अच्छी तरह खाना खाया। एक दूसरी बार वह छोटा-सा रीछ इंजन का एक गैलेन पुराना तेल पी गया। लेकिन इसका उस पर कुछ भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ा।
उसके आनन्दमयी करतय
महीने बीतते गये। ब्रूनो आकार में बड़ा हो चुका था। वह दोनों कुत्तों के बराबर ऊँचा हो गया था। वह उनसे बड़ा भी दिखाई पड़ता। था। कभी-कभी वह शरारती और खिलंदड़ हो जाता था। वह उन सभी लोगों का चहेता था। सब से अधिक वह लेखक की पत्नी से प्यार करता था। वह भी उससे प्यार करती थी। उसने उसका नाम ब्रूनों से बाबा बदल दिया था। यह रीछ का बच्चा कुछ एक करतब भी कर सकता था। उसके आदेश पर बाबा ‘कुश्ती’ या ‘बाक्सिग कर सकता था। वह एक डण्डे को ‘बन्दूक’ की तरह पकड़ सकता था। लेकिन किरायेदारों के बच्चों के कारण उसे अधिकतर समय जंजीर में बाँध दिया जाता था।
ब्रूनो का मैसूर के चिड़ियाघर में जाना
लेखक, उसके लड़के और मित्रों ने उसकी पत्नी को सलाह दी कि बाबा को मैसूर चिड़ियाघर में भेज दिया जाये। वह बहुत बड़ा हो गया था। उसे घर पर नहीं रखा जा सकता था। अन्त में वह मान गई। चिड़ियाघर के प्रबन्धक को एक पत्र लिखा गया। चिड़ियाघर ने मैसूर से लॉरी में एक पिंजरा भेज दिया। बाबा को पैक करके भेज दिया गया।
घर पर ब्रूनो की याद
परन्तु उन सभी को ब्रूनो की कमी बहुत खलती थी। उसकी पत्नी रोयी और कोई उसे सांत्वना नहीं दे सकता था। कुछ दिन के लिए वह कुछ भी नहीं खाती थी। उसने चिड़ियाघर के प्रबन्धक को अनेक पत्र लिखे। वहाँ पर बाबा भी सांत्वनाहीन था। उसने भी खाना बन्द कर दिया। वह ठीक था लेकिन दुबला और उदास दिखाई पड़ता था। लेखक ने अपनी पत्नी को मैसूर जाने से 3 महीने तक रोके रखा। वह अपनी जिद्द पर अड़ी रही। आखिरकार, वह अपनी पत्नी को ब्रूनो या बाबा के पास ले गया।
लेखक की पली की चिड़ियाघर में ब्रूनो से मुलाकात
मित्रों ने अनुमान लगाया था कि ब्रूनो उसे पहचान नहीं पायेगा। लेकिन जिस क्षण बाबा ने उसे देखा वह उसे पहचान गया। वह प्रसन्नता से चीखा। वह दौड़कर उसके पास गयी। उसने सलाखों में से उससे दुलार किया। वह प्रसन्नतापूर्वक खड़ा हो गया। वह पिंजड़े को तीन घण्टे तक छोड़ती ही नहीं थी। उसने उसके लिए चाय, केक, आईसक्रीम आदि कई चीजें दीं। आखिरकार, समय समाप्त हो गया। अब उन्हें बिछड़ना था।
ब्रूनो की घर वापसी
लेखक की पली फूट-फूट कर रो रही थी। बाबा भी फूट-फूट कर चीख रहा था। कठोर प्रबन्धक भी उदास हो गया और उसका दिल पिघल गया। उसने बाबा को वापस भेजने के लिए उससे विनती की। उसने अपनी मजबूरी दिखाई। बाबा अब सरकार की सम्पत्ति थी। फिर वे सुपरिन्टेंडेण्ट के पास गये। उसने आँसू भरी विनती की। सुपरिन्टेंडेण्ट एक दयाल हृदयी व्यक्ति था। वह मान गया। उसने बाबा को वापस बैंगलौर ले जाने के लिए उन्हें एक पिंजरा भी दिया। बाबा को एक छोटे से पिंजरे में ले जाया गया। उर्स कार के ऊपर रखा गया।
ब्रूनो घर पर
घर पर बाबा के लिए एक द्वीप बनाया गया। यह 20 फुट लम्बा और 15 फुट चौड़ा था। एक खाई इसे घेर रही थी। यह 6 फुट चौड़ी और सात फुट गहरी थी। रात को सोने के लिए बाबा के लिए एक लकड़ी का बक्सा बनाया गया था। उसे गर्म रखने के लिए अन्दर फूस रख दिया गया था। कुछ दिनों में बाबा को द्वीप पर आजाद कर दिया गया। वह प्रसन्न हो गया। लेखक की पत्नी वहाँ घण्टों बैठ कर समय बिताती थी। बाबा उसकी गोद में बैठता था। अब बाबा 15 महीने का हो गया था और काफी भारी हो चला था।
मनुष्य और जानवरों में प्यार
यह मानव की एक रीछ के बच्चे के साथ प्रेम और मित्रता की कहानी है। रीछ के इस बच्चे में बहुत से मानवीय गुण हैं। उसमें प्यार भावना, स्नेह, और वफादारी विद्यमान हैं।

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